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जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान है

जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है।
इसके वास्ते ये तन है, मन है और प्राण हैं।।

इसके कण-कण में लिखा राम-कृष्ण नाम है।
हुतात्माओं के रूधिर से भूमि शस्य-श्याम है।
धर्म का ये धाम है, सदा इसे प्रणाम है।
स्वतंत्र है धरा यहां, स्वतंत्र आसमान है।
जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है।।1।।

इसकी आन पर कभी जो बात कोई आ पड़े।
इसके सामने जो जुल्म के पहाड़ हों खड़े।।
शत्रु सब जहान हों, विरूद्ध विधि-विधान हो,
मुकाबला करेंगे जब तक जान में ये जान है।
जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है।।2।।

इसकी गोद में हजारों गंगा-यमुना झूमती।
इसके पर्वतों की चोटियां गगन को चूमती।।
भूमि ये महान है, निराली इसकी शान है।
इसकी जय-पताका ही स्वयं विजय-निशान है।
जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है।।3।।


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देश हमें देता है सब कुछ

http://www.bvpindia.com/cks_01.htm

देश हमें देता है सब कुछ,
हम भी तो कुछ  देना सीखें।।

सूरज हमें रोशनी देता,
हवा नया जीवन देती है,
भूख मिटाने को हम सबकी,
धरती पर होती खेती है,
औरों का भी हित हो जिसमें,
हम ऐसा कुछ करना सीखें।। 1।।

पथिकों को तपती दुपहर में,
पेड़ सदा देते हैं छाया,
सुमन सुगंध सदा देते हैं,
हम सबको फूलों की माला,
त्यागी तरुओं के जीवन से
हम परहित कुछ करना सीखे ॥2॥

जो अनपढ़ हैं उन्हें पढ़ायें,
जो चुप हैं उनको वाणी दें,
पिछड़ गये जो उन्हें बढ़ायें,
प्यासी धरती को पानी दें,
हम मेहनत के दीप जलाकर,
नया उजाला करना सीखें।। 3।।


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भारत वंदे मातरम्

http://www.bvpindia.com/cks_23.htm

भारत वंदे मारतम् जय, भारत वंदे मातरम्।।
भारत वंदे मातरम् जय, भारत वंदे मातरम्।।

रुक ना पाए तू्फानों में, सबके आगे बढ़े कदम
जीवन पुष्प चढ़ाने निकले माता के चरणों में हम।। वंदे मातरम।।1।।

मस्तक पर हिमराज विराजित, उन्नत माथा माता का।
चरण धो रहा विशाल सागर, देश यही सुंदरता का।
हरियाली साड़ी पहने मां, गीत तुम्हारे गायें हम।। वंदे मातरम्।।2।।

नदियों की पावन धारा है, मंगल माला गंगा की।
कमरबंद है विंध्याद्रि का, सातपुड़ा की श्रेणी की।
सह्याद्रि का वज्रहस्त है, पौरुष को पहचानें हम।। वंदे मातरम्।।3।।

नहीं किसी के सामने हमने, अपना शीश झुकाया है।
जो हमसे टकराने आया, काल उसी का आया है।
तैरा वैभव सदा रहे माँ, विजय ध्वजा फहरायें हम।। वंदे मातरम्।।4।।


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निर्माणों के पावन युग में

निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें।
स्वार्थ समाधान की आँधी में वसुधा का कल्याण न भूलें।।

माना अगम अगाध सिंधु है, संघर्षों का पार नहीं है,
किन्तु डूबना मझधारों में, साहस को स्वीकार नहीं है,
जटिल समस्या सुलझाने को नूतन अनुसंधान न भूले।।1।।

शीतल विनय आदर्श श्रेष्ठता तार बिना झंकार नहीं है,
शिक्षा क्या स्वर साध सकेगी?   यदि नैतिक आधार नहीं है,
कीर्ति कौमुदी की गरिमा में संस्कृति का सम्मान न भूले।।2।।

आविष्कारों की कृतियों में, यदि मानव का प्यार नहीं है,
सृजनहीन विज्ञान व्यर्थ है, प्राणी का उपकार नहीं है,
भौतिकता के उत्थानों में, जीवन का उत्थान न भूलें।।3।।


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संगठन गढ़े चलो

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो,
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो।।

युग के साथ मिल के सब, कदम बढ़ाना सीख लो,
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो,
भूल कर भी सुख में जाति, पंथ की न बात हो,
भाषा प्रांत  के लिए, कभी न रक्तपात हो,
फूट का भरा घड़ा है, फोड़ कर बढ़े चलो।।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो।।

आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार,
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार,
कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुरा के सब सहेंगे हम,
देश के लिए सदा जिएंगे और मरेंगे हम,
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है ये सोच लो।।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किये चलो।।


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राष्ट्र की जय चेतना

राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम्,
राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वंदे मातरम्।।
वंदे मातरम् ….

वंशी के बहते स्वरों का प्राण वंदे मातरम्,
झल्लरी झनकार झनके नाद वंदे मातरम्,
शंख के संघोष का संदेश वंदे मातरम्।।1।।

सृष्टि बीज मंत्र  का है मर्म वन्दे मातरम्,
राम के वनवास का काव्य है वंदे मातरम्,
दिव्य गीता ज्ञान का संगीत वंदे मातरम्।।2।।

हल्दीघाटी के कणों में व्याप्त वंदे मातरम्,
दिव्य जौहर ज्वाल का है तेज वंदे मातरम्,
वीरों के बलिदान की हुंकार वंदे मातरम्।।3।।

जन-जन के हर कंठ का हो गान वंदे मातरम्,
अरिदल थर-थर काँपे सुनकर नाद वंदे मातरम्,
वीर पुत्रों की अमर ललकार वंदे मातरम्।।4।।


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Chalein Gaaon Ki Ore (चलें गाँव की ओर)

http://shakha-geet.blogspot.in/2016/06/chalein-gaaon-ki-ore.html

Chalein Gaaon Ki Ore (चलें गाँव की ओर)

स्वावलंबी  स्वाभिमानी भाव जगाना है,
चलें गाँव के ओर, हमें फिर वैभव लाना है ||

हर घर में गो-माँ की सेवा, पशुधन का हो पालन,
जल की रक्षा करने से हो, धरती माँ का पोषण |
बने औषधि पंचगव्य से, खाद….. गोबर से,
स्वच्छ रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे, भाव जगाना है,
जड़ी-बूटी से खुशहाली, हमें गाँव में लाना है ||१||
चलें गाँव के ओर……………

गाँव में होगी जैविक खेती, जमीं के नेचे पानी,
धान सब्जी फल और फूल से, सजेगी धरती सारी |
कोई न होगा भूखा-प्यासा, पूरी होगी सबकी आशा,
स्नेह और सहकारिता का, भाव जगाना है,
कृषि-आधारित समृद्धि, हर गाँव में लाना है ||२||
चलें गाँव के ओर……………

ग्रामोद्योग विस्तार से सबका, निश्चित हो रोजगार,
जिएं सादगी से सब रखें, मन में उच्च-विचार |
गाँव का हर बच्चा हो शिक्षित, हर युवा संस्कारित निर्भिक,
भारत माता के जय हो, यह भाव जगाना है,
राम-राज्य के सपने को, साकार कराना है ||३||
चलें गाँव के ओर……………

ग्राम-नगर-वन के सब वासी, भारत की संतान,
एक संस्कृति-एक धर्म है पुरखे सबके समान |
ऊंच-नीच का भेद भुलाकर, कंधे से कंधा मिलाकर,
समरसता का गीत गाकर, कदम बढ़ाना है,
इस हेतु से तन-मन-धन, जीवन लगाना है ||४||
चलें गाँव के ओर……………

||भारत माता की जय||


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भुवनमण्डले नवयुगमुदयतु

भुवनमण्डले नवयुगमुदयतु

भुवनमण्डले नवयुगमुदयतु सदा विवेकानन्दमयम् ।

सुविवेकमयं स्वानन्दमयम् ॥धृ॥

तमोमयं जन जीवनमधुना निष्क्रियताऽऽलस्य ग्रस्तम् ।

रजोमयमिदं किंवा बहुधा क्रोध लोभमोहाभिहतम् ।

भक्तिज्ञानकर्मविज्ञानै: भवतु सात्विकोद्योतमयम् ॥१॥

वह्निवायुजल बल विवर्धकं  पाञ्चभौतिकं विज्ञानम् ।

सलिलनिधितलं गगनमण्डलं करतलफलमिव कुर्वाणम् ।

दीक्षुविकीर्णं मनुजकुलमिदं घटयतुचैक कुटुम्बमयम् ॥२॥

सगुणाकारं ह्यगुणाकारं एकाकारमनेकाकारम् ।

भजन्ति एते भजन्तु देवं स्वस्वनिष्ठया विमत्सरम् ।

विश्वधर्ममिममुदारभावं प्रवर्धयतु सौहार्दमयम् ॥३॥

जीवे जीवे शिवस्यरूपं सदा भवयतु सेवायाम् ।

श्रीमदूर्जितं महामानवं समर्चयतु निजपूजायाम् ।

चरतु मानवोऽयं सुहितकरं धर्मं सेवात्यागमयम् ॥४॥

 


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मनसा सततम् स्मरणीयम्

मनसा सततम् स्मरणीयम्

मनसा सततम् स्मरणीयम्

वचसा सततम् वदनीयम्

लोकहितम् मम करणीयम् ॥धृ॥

न भोग भवने रमणीयम्

न च सुख शयने शयनीयम्

अहर्निशम् जागरणीयम्

लोकहितम् मम करणीयम् ॥१॥

न जातु दुःखम् गणनीयम्

न च निज सौख्यम् मननीयम्

कार्य क्षेत्रे त्वरणीयम्

लोकहितम् मम करणीयम् ॥२॥

दुःख सागरे तरणीयम्

कष्ट पर्वते चरणीयम्

विपत्ति विपिने भ्रमणीयम्

लोकहितम् मम करणीयम् ॥३॥

गहनारण्ये घनान्धकारे

बन्धु जना ये स्थिता गह्वरे

तत्र मया सन्चरणीयम्

लोकहितम् मम करणीयम् ॥४॥

http://sangh-geet.blogspot.in/2012/01/blog-post_14.html


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BRICS -Labour & employment Ministers Conference

Today(26-07-2017) BRICS -Labour & employment Ministers Conference held at Changqing , China. All the members of Trade Unions were invited.Indian Labour Minister and Labour Secretary were also present .Sri B.Surendran ji  National Organising secretary -BMS-Bharat met ILO Director General Mr.Guy Ryder and Secretary General of ISSA Mr.Konkesky, an international expert on Social Security along with other dignitaries. Minister took a group photo with all Indian Delegates