धरती की शान

धरती की शान तू भारत की संतान, तेरी मुट्ठियों में बंद तूफान है रे, मनुष्य तू बड़ा महान है।। तू जो चाहे पर्वत पहाड़ों को फोड़ दे, तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड़ दे, तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे, तू जो चाहे धरती को अम्बर से जोड़ दे, अमरContinue reading “धरती की शान”